सामान्य
जनसँ राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तरक चिन्तक लोकनि धरि एखन जाहि चिन्तनमे, जाहि
खोजमे, जाहि
प्रयासमे लीन छथि तकर केन्द्रमे दूइए प्रमुख विषय अछि- कोरोना महामारीसँ जीवनकेँ बचायब
आ महामारीक पश्चातक जन-जीवनक संचालन। जीवनपर कोनो आपदाक कतबा असरि पड़ल तकर सटीक
मूल्यांकन आपदाक घड़ी बितलाक बादहि होइत छैक। एहि प्रसंग मिथिलामे बड़ प्रचलित
कहबी अछि जे बाढ़िक असरि पानि घटलाक बाद बुझबामे अबैत छैक।
महामारीसँ
जीवनकेँ बचयबाक एखनधरिक जे सभसँ सटीक उपाय हमरा लोकनिक सोझाँ अछि से थिक संक्रमणसँ
बचाव, आ देश-समाजमे संक्रमणक विस्तार रोकबाक लेल सरकार लग जे सभसँ कारगर तकनीकि
छैक से थिक- लॉकडाउन। परिणामस्वरूप आइ लगभग पन्द्रह दिनसँ समूचा देश सरकारी
आदेशानुसार तालाबंद अछि। एहिना विश्वक अनेक देशमे तालाबंदी छैक। लोक अपन-अपन घरमे
बंद छथि। कारोबार ठप्प अछि। ठप्प अर्थव्यवस्थासँ आगामी समयमे जन-जीवनक त्रस्त होयब
सेहो निश्चित अछि। तथापि एखन प्राथमिकता अछि जीवन बचायब।
सरकार
लग संक्रमण रोकथामक हेतु जे दोसर विकल्प छैक से थिक अधिकसँ अधिक संभावित मरीजक, कमसँ कम समयमे जाँच आ संक्रमित मरीजक इलाज करब। जतेक कम समयमे जतेक अधिक
जाँच होयत, बिमारीक पसार पर ओतेक नियंत्रण होयत। किन्तु
सरकारो लग उपलब्ध साधनक एकटा सीमा होइत छैक। भारतमे एखन प्रतिदिन लगभग दस हजार
लोकक जाँच भए रहल अछि तथा आशा कयल जा रहल अछि जे आगामी किछु दिनमे ई संख्या बढ़ि
कए बीस हजार व्यक्ति प्रतिदिन तक पहुँचत। यद्यपि भारत सन विशाल देशक हिसाबे इहो
अपर्याप्त सिद्ध भए सकैत अछि यदि भारतवासी स्वयं संक्रमणसँ बचबाक
लेल सावधान नहि
रहताह। देशक जाँच क्षमताक विस्तार एहि बातपर निर्भर करैत अछि जे आवश्यक मात्रामे
जाँच किट ईत्यादिक उपलब्धता सुनिश्चित हो। किछु देशी कम्पनी जाँच किटक उत्पादन
शुरू कयलक अछि तथापि विदेशी आपूर्तिपर सेहो हमरा लोकनिकेँ निर्भर रहय पड़त।
विदेशसँ आवश्यक सामग्रीक कतेक आपूर्ति सम्भव होयत से कहब आसान नहि अछि। कारण एखन
देशक बीच एहि सामग्री सभक होड़ मचल अछि। एहि सामग्री सभक लेल अंतर्राष्ट्रीय
स्तरपर कतेक प्रतिस्पर्धा अछि तकर एकटा बानगी देखल जाउ- जर्मनी चीनसँ एहि सामग्री
सभक आयात हेतु चीनी उत्पादककेँ ऑर्डर देलक। उत्पादक जर्मनी हेतु सामग्री विमानसँ
पठयबाक व्यवस्था कयलक। चीनसँ चलल जर्मनीक बाटमे ओ विमान बैंकाकमे ईंधन भरबाक लेल
उतरल। उक्त विमानमे कोरोना महामारीसँ लड़बाक लेल उपयुक्त सामग्री अछि आ चीनसँ
जर्मनी जा रहल अछि से खबरि अमेरिकी सरकारकेँ भेटलैक। ओ तत्काल चीनी निर्यातकसँ
सम्पर्क कयलक आ जर्मनीसँ भेल डीलसँ तीन गुना दामपर उक्त सामग्री कीनि लेलक। विमान
बैंकाक हवाई अड्डासँ जर्मनीक फ्रैंकफर्ट नहि अमेरिका बोस्टन लेल रवाना भेल। कहबाक
तात्पर्य जे विदेशी साजो-सामानक उपलब्धता एखन घोर अनिश्चिततामे फँसल अछि, आ तेँ भारतोकेँ पर्याप्त जाँच किट ससमय उपलब्ध भऽ जेतैक से आवश्यक नहि।
एहन परिस्थितिमे देशमे जतेक कम जाँच किटक आवश्यकता पड़य ततेक नीक।
एतय
एकटा आर चिन्ताजनक स्थिति अछि। कोरोनाक विरूद्ध चलि रहल युद्धक सभसँ महत्वपूर्ण
योद्धा छथि हमरा लोकनिक स्वास्थ्यकर्मी। हिनका लोकनिक सुरक्षा सर्वोपरि अछि। हिनका
लोकनिक सुरक्षित रहनहि हमरा लोकनि ई युद्ध जीति सकब। अतः हिनका लोकनि सुरक्षा ओ
सहायता सरकार ओ जनताक कर्तव्य थिक। मुदा भए उनटा रहल अछि। काल्हि मुंबईक दू गोट
अस्पताल बंद कए देल, कारण ओतय कार्यरत
स्वास्थ्यकर्मीमे कोरोनाक संक्रमण भेटल। तहिना दू दिन पूर्व दिल्लीक एक अस्पतालक एकसय
सँ अधिक कर्मीकेँ कोरोना संक्रमणक कारणे ड्युटीसँ अलग कयल गेल। देशक अन्यान्य
भागसँ स्वास्थ्यकर्मी लोकनि सेहो लगातार शिकायत कए रहल छथि जे हुनका लोकनिकेँ
पर्याप्त मात्रामे सुरक्षा-साधन यथा जैकेट, मास्क आदि उपलब्ध
नहि भऽ पाबि रहल छनि। हालाँकि ई कहब अनुचित होयत जे सरकार एहि दिशामे प्रयास नहि
कए रहल अछि तथापि एहिमे कोनो आशंका नहि जे सरकारक तैयारी अधूरा छल। मुदा ताहूसँ
दुर्भाग्यपूर्ण अछि जे किछु तथाकथिक सत्ता समर्थक लोक एहन शिकायतकर्ता
स्वास्थ्यकर्मीक विरूद्ध अभियान चला रहल छथि। हिनाक लोकनिकेँ मानसिक रूपेँ प्रताड़ित
कयल जा रहल अछि। एतय धरि जे काल्हि दिल्ली एम्सक कर्मी लोकनि प्रधानमंत्रीकेँ पत्र
लिखबाक लेल विवश भए गेलाह अछि। की हमरा लोकनि एहने कृतज्ञता प्रकट करबाक हेतु घंटी
बजौने रही? सरकारकेँ एहन तत्वक विरूद्ध कठोरतम कार्यवाही
करबाक चाही। समाज एहन लोकक मनोबल किन्नहु नहि बढ़ाबय। ओकरा सभ कुकृत्य भर्त्सना
करय।
कोरोना
महामारीसँ लड़बाक लेल हमरा सभक जे तेसर सभसँ कारगर शस्त्र भऽ सकैत अछि, से थिक सामाजिक सौहार्द आ एकता। ई एहन अस्त्र अछि जे सभ समय, सभ तरहक लड़ाईमे काज अबैत अछि। एखन एहि अस्त्रक आर महत्व बढ़ि गेल अछि
कारण ई एकदिस जतय बिमारीसँ लड़बाक लेल हमरा लोकनिकेँ शक्ति प्रदान करत ओतहि दोसर
दिस आगामीकालमे महामारीजन्य विपदासँ संघर्षक बाट सेहो देखाओत। राजनैतिक दल केहनो
परिस्थितिमे राजनीति करब नहि छोड़ैत अछि। ई ओकर जीवन छैक। तखन परिस्थितिक हिसाबे
ओकर व्योंत अवश्य बदलैत रहैत छैक आ जनता राजनेताक बिछाओल नव-नव फानी बला जालमे
फँसैत रहैत अछि। सामाजिक ऐक्य ओ सद्भाव आजुक राजनीतिक सभसँ पैघ शत्रु थिक, से कहबामे हमरा मिसियो भरि असोकर्य नहि भए रहल अछि। समाज जतेक विघटित रहत,
लोक आपसमे जतेक लड़त-मरत, राजनेताक लेल
सत्ता-प्राप्तिक मार्ग ओतेक सहज होइत छैक। आजुक राजनीति केवल आ केवल
सत्ता-प्राप्तिक खेल थिक। एहन खेल जाहिमे कोनो खेलाड़ी नहि हारैत अछि। हारैत अछि
खेलक उपक्रम बनल जनता मात्र। तेँ अति आवश्यक अछि जे जनता एहि खेलक मर्मकेँ बूझय आ
कोनो राजनेता कि राजनीतिक दलक बूनल जालमे फँसबासँ बाँचय। सामाजिक-साम्प्रदायिक
सद्भावक प्रयास आजुक समयक सभसँ पैघ देश-सेवा होयत। आखिर यैहटा एकमात्र आ कदाचित्
सभसँ महत्वपूर्ण अस्त्र हमरा लोकनि जनताक हाथमे अछि जाहिसँ हमसब बिना सरकारक मुँह
तकने कोरोना महामारीसँ उपजल समस्या सभक मोकाबिला कए सकब।Published on 07.04.2020
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