Thursday, June 4, 2020

दू-टप्पी

पत्रकारक प्रधान धर्म होइत छैक, सत्तासँ प्रश्न करब। ओकर शासन व्यवस्थामे कतय कोन कमी छैक तकरा रेखांकित करब। सरकारक दुर्नीतिक विरुद्ध जनताकेँ चेतायब। मुदा आई पत्रकार सत्ताक बदला जनता आ विपक्षसँ प्रश्न करैत अछि। वा कहि सकैत छी जे ओ पत्रकारिता धर्म बिसरि गेल अछि। ओकरा लग आब प्रश्न करबाक लूरि नहि बाँचल छैक।
आजुक समयमे जे अपनाकेँ पत्रकार कहैत छथि, से मात्र अपन व्यक्तिगत ओ संस्थागत लाभ-हानिक चिंता करैत छथि। हुनका सत्ताक नजदीकी आ चापलूस बनबामे अधिक लाभ देखाइत छनि। आ लाभक आगाँ धर्मक कोन मोल?
आजुक समयमे पत्रकारिता केवल आ केवल मात्र एक व्यवसाय थिक। पत्रकार मात्र प्रचारक छथि। जी, विज्ञापनक एकटा मॉडल मात्र। हुनकर काज छनि, ओहि मुद्दा, ओ विषय, ओहि विचारधाराकेँ उठायब, जाहिसँ ओ सत्ताधीशक कृपापात्र बनल रहताह।
पूर्वमे सेहो एहन पत्रकार होइत छलाह। मुदा तहिया ई कुकर्म झाँपल-तोपल रहैत छल। एहन पत्रकारक संख्या कम छल तहिया। आब सबकिछु उघार अछि। निर्लज्जताक पराकाष्ठा।
लोकतंत्रमे जखन मिडियाकेँ चारिम स्तम्भ कहल गेल हेतैक तँ सबहक यैह परिकल्पना होयतनि जे पत्रकार जनता आ जन-सरोकारक पक्षकार बनताह। मुदा आई एहन भावना कोनो पत्रकारमे विरले भेटत। आई पत्रकारक उद्देश्य छनि जे सत्ताधारी नेताक सङ्ग हुनकर नजदीकी बढनि। ओहि नजदीकीक प्रयोगसँ अपन समाजमे रुतबा बढनि। आ ओहि रुतबाक बलपर ओ किछु अलभ्य प्राप्त करथि।
ई एहन समय अछि जखन जनताकेँ पत्रकारपर ओकर पत्रकारिता पर आँखि मुनि क' विश्वास नहि करबाक चाही। पत्रकार आब विश्वासपात्र नहि विश्वासघाती जीव अछि।
पत्रकारिताक एहि क्षरणक एकटा पैघ कारण छैक जे आब पत्रकार अधिकांशतः ओहन व्यक्ति सब बनैत छथि जे जीवनक अन्यान्य क्षेत्रमे असफल छथि। गामघरमे अपन आसपास एहन दर्जनों युवक लोकनि भेटि जयताह जे अच्छरकट्टु छथि मुदा हुनकर बाइकपर 'प्रेस' लिखल भेटत। जनिका सामान्य नीक-बेजायक ज्ञान छनि, जनिका अपन सामाजिक-पारिवारिक ओ राष्ट्रीय दायित्वक बोध नहि छनि, से पत्रकारिताक दायित्व सम्हारि सकताह, ई सम्भव अछि?
कतेक दुर्भाग्यपूर्ण अछि जे पत्रकारिता जे एक समयक विचारक-विद्वानक, सिद्धांतवादी समाजसेवी लोकनिक कर्त्तव्य-क्षेत्र छल, आब मूर्ख-अपाटक आ असामाजिक लोकक वृत्ति बनि गेल अछि।

Posted on FB 23.04.2020

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